गुजरात गंभीरा पुल हादसा
गुजरात में एक बार फिर पुल गिरने का बड़ा मामला देखने को मिला. इस बार वडोदरा के पादरा और आणंद जिलों को जोड़ने वाला महिसागर नदी पर बना 45 साल पुराना गंभीरा पुल ढह गया. इसकी वजह पुल का लंबे समय से जर्जर हालत में होना बताया जा रहा है. गुजरात में 2021 के बाद पुल ढहने की सातवीं घटना है. साल 2022 में मोरबी सस्पेंशन ब्रिज भी गिर गया था, जिसमें 135 लोग मारे गए थे.
आर एंड बी ने 3 साल पहले जारी की थी चेतावनी
तीन साल पहले गुजरात के सड़क एवं भवन (आर एंड बी) विभाग के वडोदरा संभाग के अधिकारियों ने इस पुलिस को लेकर चेतावनी जारी की थी. इस पुलिस के पुननिर्माण का सुझाव दिया था. यानी विभागीय अधिकारियों ने सरकार को बहुत पहले सेचत कर दिया था. विभागीय लापरवाही की वजह से 45 साल पुराना यह पुल ढह गया, जिसमें 15 लोगों की मौतें हुई है.
इस घटना को लेकर गुजरात के मुजपुर से वडोदरा जिला पंचायत सदस्य हर्षदसिंह परमार ने 4 अगस्त, 2022 को स्थानीय अधिकारियों को इस बारे में पत्र लिखा था. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, "हमारी चेतावनियों के बावजूद आर एंड बी विभाग ने इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं की."
अधीक्षण अभियंता का दावा क्या है?
जिला कलेक्टर के अतिरिक्त चिटनिस (राजस्व अधिकारी) के अनुसार हर्षद सिंह परमार के पत्र को आर एंड बी विभाग के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता को भेजा गया था. संपर्क करने पर वर्तमान कार्यकारी अभियंता नैनीश नायकवाला ने कहा, "पुल की हमारी (निरीक्षण) रिपोर्ट में किसी बड़े नुकसान का संकेत नहीं था. यह जर्जर नहीं था. बेयरिंग कोट क्षतिग्रस्त था और तदनुसार पिछले साल मरम्मत की गई थी."
मार्च 2022 में मोरबी पुल ढहने पर गुजरात उच्च न्यायालय में स्वतः संज्ञान वाली एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया था कि उसने नगर पालिकाओं और नगर निगमों में पुलों के निरीक्षण और रखरखाव के लिए एक नीति तैयार की है. चार महीने बाद राज्य सरकार ने आरएंडबी विभाग के सचिव को हटा दिया और अधिकारियों ने कहा कि नवनिर्मित पुलों में घटिया काम की कई रिपोर्टों के बाद मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया था.
गुजरात में 2121 के बाद पुल ढहने की घटनाएं
23 अक्टूबर, 2023: बनासकांठा जिले के पालनपुर में एनएच 58 पर एक निर्माणाधीन पुल के गर्डर गिरने से दो लोगों की दबकर मौत हुई थी.
28 जून, 2023: सीएम भूपेंद्र पटेल द्वारा पुल उद्घाटन के मात्र 42 दिन बाद सूरत में तापी नदी पर बने वरियाव पुल में पहली बारिश के बाद दरारें आ गईं. सूरत नगर आयुक्त ने पुल प्रकोष्ठ के तकनीकी सहायक को निलंबित कर दिया और पर्यवेक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया.
15 जून, 2023: वलसाड में एक रेलवे ओवरब्रिज, जिसका अभी उद्घाटन नहीं हुआ था, के कुछ हिस्सों से कंक्रीट के टुकड़े गिर गए.
14 जून, 2023: तापी ज़िले में मिंधोला नदी पर बने एक नए 100 मीटर लंबे पुल का मध्य भाग ढह गया था.
30 अक्टूबर, 2022: मोरबी में मच्छू नदी पर 1887 में बना सस्पेंशन ब्रिज मरम्मत के लिए सात महीने बंद रहने के बाद दोबारा खुलने के चार दिन बाद ही ढह गया. कम से कम 135 लोग मारे गए थे.
21 दिसंबर, 2021: अहमदाबाद के दक्षिण भोपाल के मुमतपुरा में एक फ्लाईओवर ब्रिज का एक हिस्सा स्ट्रेस टेस्ट के दौरान एक स्लैब के गिर जाने से ढह गया था.
मोहम्मद यूनुस
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 26 जुलाई को मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की नीयत पर सवाल उठाया. पार्टी के नेता ने कहा कि देश में सुशासन का कहीं कोई नाम नहीं है. न तो कोई ठोस सुधार हुए हैं और न ही अपराध पर अंकुश लग पाया है, जिसके चलते देशभर में फिरौती और रंगदारी की घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है.
कानून व्यवस्था बदहाल
बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान ये बात कही. कार्यक्रम में अंतरिम सरकार के वित्तीय सलाहकार सालेह उद्दीन अहमद भी मौजूद थे. फखरुल ने कहा, “एक व्यवसायी जो पहले 1 लाख टका देता था, अब उसे 5 लाख टका देना पड़ रहा है. कहीं कोई सुशासन या नियंत्रण नहीं है. पुलिस व्यवस्था में भी कोई सुधार नहीं हुआ है.”
लोकतंत्र की बहाली पर जोर
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा लोकतांत्रिक प्रक्रिया की तत्काल बहाली की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “सुधार रातों-रात लागू नहीं हो सकते. इसके लिए समय चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लोकतंत्र को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए. देश को जबरन थोपा गया कोई भी मॉडल स्वीकार्य नहीं होगा. इसलिए समय गंवाए बिना, हमें जनप्रतिनिधियों को संसद भेजकर लोकतांत्रिक रास्ते पर लौटना होगा.”
आरजेडी नेता मदन शाह
बिहार की राजनीति हमेशा से बयानों, आरोपों और भविष्यवाणियों के लिए जानी जाती रही है. चुनाव से पहले का एक ऐसा ही बयान अब फिर चर्चा में है—जब एक नाराज RJD नेता ने तेजस्वी यादव को 25 सीटों का ‘श्राप’ दिया था. उस समय इसे व्यक्तिगत नाराजगी माना गया, लेकिन नतीजे आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर वह नेता कौन था और क्यों उन्होंने ऐसा दावा किया था?
उस समय इस बात को राजनीतिक बयानबाजी माना गया, लेकिन जब परिणाम इसी आंकड़े के आसपास आए, तो यह भविष्यवाणी सुर्खियों में आ गई. आखिर कौन था वह नेता और क्यों दिया था ऐसा श्राप? यही सामने आया है इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में.
कौन हैं मदन साह?
मदन साह आरजेडी के नेता हैं. उन्होंने जमीन से जुड़े रहे हैं. उन्होंने पार्टी के लिए इमानदारी से काम किया था. तेजस्वी यादव ने उन्हें टिकट नहीं दिया. इससे वह इतना व्यथित हुए कि पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन किया. साथ ही अपने कुर्ते तक फाड़ डाले. मदन साह जो हाल के वर्षों में पार्टी से दूरी महसूस कर रहे थे, टिकट वितरण में की गई अनदेखी और आंतरिक फैसलों को लेकर तेजस्वी यादव पर नाराजगी जताई थी.
उनका आरोप था कि पार्टी जमीन छोड़कर ‘चुनिंदा लोगों’ पर भरोसा कर रही है, जिसका नुकसान चुनाव में दिखेगा. इसी नाराजगी में उन्होंने कहा था - “तेजस्वी चाहे जितनी कोशिश कर लें, RJD 25 सीटों से ऊपर नहीं जाएगी.” चुनाव नतीजों के बाद यह भविष्यवाणी काफी हद तक सही बैठी और सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा का विषय बन गई.
(फाइल फोटो)
Nagpur Bomb Threat to Nitin Gadkari: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को उनके नागपुर स्थित आवास को बम से उड़ाने की धमकी मिली है. यह धमकी रविवार सुबह करीब 8:46 बजे पुलिस के इमरजेंसी नंबर 112 पर एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा कॉल कर दी गई. कॉल मिलते ही नागपुर पुलिस में हड़कंप मच गया और तुरंत केंद्रीय मंत्री के वर्धा रोड स्थित एनरिको हाइट्स नामक आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई.
धमकी मिलने के तुरंत बाद प्रतापनगर पुलिस स्टेशन को सूचित किया गया और मौके पर पुलिस बल के साथ बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) को भी बुलाया गया. पुलिस ने पूरे इलाके की गहन तलाशी ली, लेकिन तलाशी के दौरान किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला.
जोन-1 के डीसीपी ऋषिकेश रेड्डी ने मीडिया को जानकारी दी कि अज्ञात कॉलर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और उसकी पहचान करने के लिए टेक्निकल सर्विलांस की मदद ली जा रही है. कॉल की लोकेशन और कॉलर की पहचान को लेकर पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है. इस बीच गडकरी के आवास की सुरक्षा को और अधिक कड़ा कर दिया गया है.
बताया जा रहा है कि नितिन गडकरी घटना के समय नागपुर में ही मौजूद थे, ऐसे में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए चौकसी बढ़ा दी है. गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी वीवीआईपी को इस तरह की धमकी मिली हो. 13 जुलाई को भी केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी.
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में 21 साल के एक नौजवान को बिहार के बेगूसराय से गिरफ्तार किया गया था. वहीं, 26 जुलाई को मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) स्टेशन पर बम होने की सूचना दी गई थी, जो बाद में फर्जी निकली.
इन घटनाओं के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि इस तरह की झूठी धमकियों के पीछे अक्सर शरारती तत्व होते हैं, लेकिन इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला है. फिलहाल पुलिस धमकी देने वाले शख्स की तलाश में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसका मकसद क्या था, या फिर सिर्फ शरारत या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है.